श्री स्वामी समर्थ स्तवन- Shree Swami Samarth Stavan Lyrics- Dindori Pranit

Shree Swami Samarth Stavan Lyrics

श्री गणेशाय नमः | श्री सरस्वत्यै नमः | श्री गुरुभ्यो नमः | श्री कुलदेवतायै नमः|
श्री अक्कलकोट निवासी पूर्ण दत्तावतार- दिगंबर – यतीवर्य- श्री स्वामीराजाय नमः ||

ब्रह्मानंदं परमसुखदं केवल ज्ञानमूर्ती |
व्दंव्दातीत गगनसदृशं तत्वमस्यादिलक्ष्यम्  ||
एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षीभूतं |
भावातीत त्रिगुणरहित सद्गुरु तं नमामि ||

ओम रक्तांग , रक्तवर्ण पद्मनेत्र , सुहास्यवदनं , कथा- टोपी-च-माला दण्डकुमण्डलुधर , कटयांकर , रक्षक त्रैगुण्यरहित त्रैलोक्यपालक , विश्वनायक भक्तवत्सल, कलियुगे , श्रीस्वामीसमर्थवार्ताधारक पाहि माम् | पाहि माम् | पाहि माम् |

आता करूया प्रार्थना | जय जयाजी अघहरणा |
परात्परा कैवल्यसादना | ब्रह्मानंदा  यतीवर्या |
जय जयाजी पुराणपुरुषा | लोकपाला सर्वेशा |
अनंत ब्रह्मांडधीशा | वेदवध्या जगद्गुरु ||

सुखधामनिवासिया | सर्वसाक्षी करूणालया |
भक्तजन ताराया |  अनंतरूपें नटलासी ||
तूं अग्नि तूं पावन | तूं आकाश तूं  जीवन |
तूंची वसुंधरा पूर्ण | चंद्र सूर्य तूंच पैं ||

तूं विष्णु आणि शंकर | तूं विधाता तू इंद्र |
अष्टदिक्पालादि समग्र | तूचं रूपें नटलासी ||
कर्ता आणि करविता | तूंच हवी आणि होता |
दाता आणि देवविता | तूंच समर्था निश्र्चयें ||

जंगम आणि स्थिर | तूंच व्यापिलें समग्र |
तूजलागीं आदिमध्याग्र | कोठें नसे पाहतां ||
असुनिया निर्गुण | रूपे नटलासी सगुण|
ज्ञाता आणि ज्ञान | तुचं एक विश्वेशा ||

वेदाचांही तर्क चांचरे |शास्त्रातेंही नावरे ||
विष्णु शंकर एकसरें | कुंठीत झाले सर्वही ||
मी केवळ अल्पमती | करूं केवीं आपली स्तुती ||
सहस्त्रमुखही निश्चिती | शिणला ख्याती वर्णितां ||

दृढ ठेविला चरणीं माथा | रक्षावे मजसी समर्थ |
कृपाकटाक्षें दीनानाथा | दासाकडे पाहावें ||
आतां इतुकीं प्रार्थना | आणावीजी आपल्या मना |
कृपासमुद्रीं या मिना | आश्रय देईजे सदैव ||

पाप ताप आणि दैन्य | सर्व जावो निरसोन |
इहलोकीं सौख्यदेवोन | परलोक साधन करावें |
दुस्तर हा भवसागर | याचे पावावया पैलतीर |
त्वन्नाम तरणी साचार | प्राप्त हो मजला ते ||

आशा मनीषा तृष्णा | कल्पना आणि वासना |
भ्रांती भुली नाना | न बाधोत तुझ्या कृपें ||

किती वर्णुं आपुले गुण | द्यावे मज सुख साधन |
अज्ञान तिमिर निरसुन | ज्ञानार्क हृदयीं प्रगटो पैं ||
शांती मनीं सदा वसो | वृथाभिमान नसो |
सदा समाधान वसो | तुझ्या कृपेनें अंतरीं ||

भवदुःख हें निरसो | तुझ्या भजनीं चित्त वसो |
वृथा विषयांची नसो | वासना या  मनातें ||
सदा साधू- समागम | तुझें भजन उत्तम |
तेणें होवो हा सुगम | दुर्गम जो भवपंथ ||

व्यवहारीं वर्ततां | न पडो भ्रांती चित्ता |
अंगी न यावी असत्यता | सत्यें विजयी सर्वदा |
आप्तवर्गाचें पोषण | न्यायमार्गवलंबन |
इतुकें द्यावे वरदान | कृपा करूनि समर्था ||

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असोनियां संसारात | प्राशीन तव नामामृत |
प्रपंच आणि परमार्थ | तेणें सुगम मजलागीं |
कर्ता आणि करविता | तूंची एक स्वामीनाथा |
माझिया ठायी वार्ता | मीपणाची नसेची ||

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुगुरुर्देवो महेश्वराः |
गुरुः साक्षात् परं ब्रम्ह तस्मै श्रीगुरुवे नम:|

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